
अंग्रेजी अखबारों ke मामले में भारत के छोटे शहरों का हाल बड़ा अनोखा है। सारे अखबार एक दिन बाद आते हैं इसलिये ऐसा लगता है की आप अखबार नही इतिहास की पुस्कत के अंश पढ़ रहे हैं। वैसे अंग्रेजी हो या हिंदी अखबारों के फोटोग्राफ्स काफी आगे बढ़ चुके हैं। कल के टाईम्स ऑफ़ इंडिया का ही उदहारण देखिए। विरोध तो हो रहा था राष्ट्रपति बुश का और बीच मे विज्ञापन के नए तरीके ढूँढने वालो ने अपना काम कर दिखाया। रही सही कसार अखबार वालो ने इसे पहले पन्ने पर खबरों के बीच छाप कर पूरी कर दी।

No comments:
Post a Comment